90 हजार सैनिकों की पतलूनें आज भी टंगी हैं', जनरल मुनीर को बलोच नेता अख्तर मेंगल का करारा जवाब

 

पाकिस्तान में बलूचिस्तान का मुद्दा दशकों से विवाद और संघर्ष का केंद्र रहा है। लेकिन हाल ही में बलूच नेता अख्तर मेंगल ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को ऐसा करारा जवाब दिया है, जिसने देश की सियासत में हलचल मचा दी है। उनका यह बयान न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की याद दिलाता है, बल्कि पाकिस्तानी सत्ता तंत्र को आईना भी दिखाता है।


क्या कहा था जनरल असीम मुनीर ने?

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने हाल ही में बलूच अलगाववादी संगठनों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि बलूच विद्रोही पाकिस्तान की अखंडता के लिए खतरा हैं और सेना उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगी। यह बयान बलूचिस्तान में दशकों से चल रहे विद्रोह को ‘आंतरिक आतंकवाद’ कहकर दबाने की एक और कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


अख्तर मेंगल का ऐतिहासिक जवाब

जनरल मुनीर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीएनपी (बलोचिस्तान नेशनल पार्टी) के अध्यक्ष और पूर्व सांसद अख्तर मेंगल ने कहा:

"90 हजार सैनिकों की पतलूनें आज भी टंगी हैं। पहले उनकी इज्जत तो वापस ला लो, फिर बलूचों से बात करना।"

यह बयान 1971 के भारत-पाक युद्ध की याद दिलाता है, जब पाकिस्तान के 90,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था। मेंगल का इशारा यह था कि सेना को पहले अपने अतीत की शर्मनाक हारों से सबक लेना चाहिए, फिर बलूचों को धमकाना चाहिए।




बलूचिस्तान की नाराज़गी और संघर्ष

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां के लोगों को दशकों से राजनीतिक हाशिये पर रखा गया है। आरोप हैं कि इस क्षेत्र में:

  • प्राकृतिक संसाधनों की लूट हुई है,

  • स्थानीय लोगों को शिक्षा और रोजगार से वंचित किया गया है,

  • और सेना द्वारा ज़बरदस्ती, गुमशुदगी और मानवाधिकार उल्लंघनों की घटनाएं आम हो गई हैं।

मेंगल जैसे नेता इन मुद्दों को बार-बार उठाते रहे हैं लेकिन हर बार सेना और सत्ता के लोगों द्वारा इन्हें नजरअंदाज किया गया।


मेंगल का बयान क्यों मायने रखता है?

  • यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि बलूचों की ऐतिहासिक पीड़ा का प्रतिनिधित्व करता है।

  • उन्होंने यह साबित कर दिया कि बलूच अब डरने वाले नहीं हैं, बल्कि अपनी बात खुलेआम कहने लगे हैं।

  • यह बयान पाकिस्तान के भीतर लोकतंत्र और सैन्य दखल के बीच की खाई को भी उजागर करता है।


अख्तर मेंगल का बयान सिर्फ एक तंज नहीं, बल्कि चेतावनी है – कि पाकिस्तान की सत्ता को अब बलूचों की आवाज़ सुननी होगी। जनरल मुनीर जैसे अधिकारी अगर इतिहास भूल जाएंगे, तो वे वही गलतियाँ दोहराएँगे जो पाकिस्तान को पहले भी भारी पड़ी हैं।



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